भारत अद्धभुत देश है। यहाँ खुशी को उत्सव या त्यौहार जैसा बनाने की रीति रही है। इसी कारण किसी चीज की पच्चीसवीं सालगिरह को रजत- महोत्सव या जयन्ती; पचासवीं सालगिरह को स्वर्ण- महोत्सव; पचहत्तरवीं सालगिरह को अमृत- महोत्सव एवं सौवीं सालगिरह को कौस्तुभ- महोत्सव के रूप में मनाते हैं। भारत की आजादी की पचहत्तरवीं सालगिरह के अवसर पर मनाये जाने वाले \’आजादी का अमृत महोत्सव\’ में लोगों की वृहत्तम भागीदारी सुनिश्चित करने व जागरूकता के लिये सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय ने नवोन्मेषी कार्यक्रमों की श्रृंखला तैयार किया है; जिससे इस महोत्सव को \’जनभागीदारी\’ और \’जनान्दोलन\’ की भावना के साथ मनाया जा सके। आजादी का अमृत महोत्सव इस साल 12 मार्च को मोहनदास करमचन्द गाँधी के साबरमती आश्रम से 15 अगस्त 2022 को देश की आजादी की पचहत्तरवीं वर्षगांठ से जुड़ी 75 सप्ताह की उलटी गिनती के साथ शुरू किया गया। देश स्वतन्त्रता दिवस की पचहत्तरवीं सालगिरह मना चुका है। इस बार प्रधानमन्त्री ने आजादी के
बयान में कहा कि- \’भारत की आजादी की पचहत्तरवीं सालगिरह के अवसर पर मनाये जाने वाले \’आजादी का अमृत महोत्सव\’ में लोगों की वृहद भागीदारी सुनिश्चित करने व जागरूकता के लिये कार्य करना बहुत आवश्यक है। तकनीकि एवं आधुनिक माध्यमों में भी इसकी चहल- पहल को जन- आन्दोलन का हिस्सा बनाने की वृहत्तर योजना है। इसमें राष्ट्रीय गान को खड़े होकर गाना होगा और अपनी वीडियो बनानी होगी। यह वीडियो www.rashtragaan.in या www.amritmahotsav.nic.in पर अपलोड करनी होगी। इसके बाद सर्टिफिकेट मिलेगा। यह सर्टिफिकेट इन्टरनेट मीडिया पर आप अपनी भागीदारी के रूप में साझा कर सकेंगे।
सही अर्थो में सम्पूर्ण रूप से हमारे गणतन्त्र की स्वतन्त्रता को आजादी, आत्म-निर्भरता, भाईचारा, साम्प्रदायिक सद्भाव, आर्थिक व सामाजिक विषमताओं में समरसता तथा राजनीतिक स्वातन्त्रय आदि जैसे शब्दों से समझा जा सकता है। हम आज आजाद हैं, यह कहने सुनने और महसूस करने में अच्छा लगता है। यदि हम आजाद रहें तो
आगे यह और भी अच्छा होगा; लेकिन उससे भी अच्छा होगा यदि हम दूसरों को भी प्रत्येक प्रकार की स्वतन्त्रता प्रदान कर सकें। किन्तु हम किसी को भी स्वतन्त्रता के नाम पर स्वक्षन्दता नहीं प्रदान कर सकते। गरीबी, भ्रष्टाचार, अज्ञानता और अन्धविश्वास से स्वतन्त्रता चाहिये; लेकिन हमें संस्कार, सभ्यता और संस्कृति से आबद्ध रहना होगा; जिससे हमारी स्वतन्त्रता अमर्यादित होकर स्वक्षन्दता में न बदलने पाये और हम मनुष्योचित कार्य करते रहें। इसी भाव- विचार तथा कार्य- व्यवहार के कारण इस बार आजादी के जश्न में कुछ विशेष देखने को मिल रहा है। सभी जगह अमृत महोत्सव की धूम दिखायी दे रही है। जैसा कि आरम्भ में ही इस बात का उत्तर दिया जा चुका है; जिसके प्रश्न स्वरूप बहुत से लोगों की उत्सुकता यह जानने की है कि, वास्तव में यह अमृत महोत्सव क्या है और इस बार आजादी का जश्न अमृत महोत्सव के तौर पर क्यों मनाया जा रहा है? वास्तव में यह देशवासियों के लिये पुनरावलोकन का अवसर है; जिसमें हम देश, समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में अपनी भूमिका तय करके आगे बढ़ने की प्रेरणा ले सकते हैं। यह हमारे लिये यह अवसर प्रदान करता है कि हम देश के आजाद होते समय, आजाद होने के पचहत्तर वर्ष बाद और आने वाले समय में देश के लिये क्या- क्या करने वाले हैं?
देश के प्रधानमन्त्री ने इस महोत्सव का शुभारम्भ करके इसका लाइव प्रसारण शुरू किया। जैसा कि प्रधानमन्त्री जी ने घोषणा किया कि यह समारोह वर्ष 2023 तक चलेगा। वास्तव में, भारत में अमृत महोत्सव शब्द का प्रयोग काफी पहले से होता आ रहा है। गुजरात में 1995 में स्वामी नारायण सम्प्रदाय के प्रमुख जब पचहत्तर वर्ष के हुए, तो दुनियाभर में इस समुदाय ने 37 दिन का अमृत महोत्सव मनाया। वैसे, किसी चीज के 75 साल पूरे होने पर या पचहत्तरवीं जयन्ती पर अमृत महोत्सव मनाने के अनेक उदाहरण भारत के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक इतिहास में उपलब्ध हैं। अमृत महोत्सव में सीधे तौर पर आपत्तिजनक कुछ नहीं है। ज्यादातर मामलों में यह शब्दावली धार्मिक संगठनों और आयोजनों से ही जुड़ी रहती है। अन्य आयोजनों में इसका इस्तेमाल सुनायी या दिखाई नहीं देता था; लेकिन अब इसका व्यापक उपयोग होता दिखाई पड़ रहा है। इस अर्थ में भी आजादी के अमृत- महोत्सव का अतिशय महात्म्य है। देश में महोत्सव या जयन्ती शब्द तेजी से व्यवहार में आना तब आरम्भ हुआ, जब सिनेमाघरों में हिट फिल्मों का दौर शुरू हुआ। कुछ फिल्में रजत जयन्ती मनाती थीं, कुछ की स्वर्ण जयन्ती भी होती थी। कुछ खास फिल्में हीरक जयन्ती और कुछ उससे आगे भी पहुँचकर कौस्तुभ जयन्ती भी मनाती थीं और यह 25, 50, 75, 100 सप्ताह तक फिल्मों के चलने से जुड़ा रहता था। इसकी प्रेरणा फिल्मों ने भारत के आध्यात्मिक जगत से ही लिया। इसी क्रम में यह उल्लेखनीय है और उल्लेखनीय इसलिये भी है कि भारत के प्रधानमन्त्री स्वयं रुचि लेकर इस महोत्सव को मनाने में अग्रणी भूमिका का निर्वाह कर रहे हैं।
इस बार भारत की आजादी के पचहत्तरवें सालगिरह को अमृत महोत्सव के तौर पर इसलिये भी मनाया जा रहा है; क्योंकि जैसा कि प्रधानमन्त्री जी बार- बार यह कहते हैं- \’भारत का प्रत्येक व्यक्ति या नागरिक भारत को परम- वैभव पर पहुँचाने में स्वयं समर्थ होकर अपना योगदान दे सके, हम इसके लिये संकल्पित हैं और इसी उद्देश्य से कार्य कर रहे हैं।\’ इस उद्देश्य के लिये जनजागरूकता पैदा करने और सबका सहयोग लेकर आगे बढ़ने की भी प्रेरणा प्राप्त करने का आह्वाहन प्रधानमन्त्री ने किया। यद्यपि कि, आजादी की पचहत्तरवीं वर्षगाँठ वर्ष 2022 में होगी; लेकिन इसके कार्यक्रम वर्ष 2023 तक चलेंगे अर्थात देश अगले दो साल तक अमृत महोत्सव मनाता रहेगा। खासतौर पर, स्वतन्त्रता दिवस और गणतन्त्र दिवस जैसे अवसर भारत में राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाये जाते हैं। माना यह जाता है कि सभी समुदाय, धर्म और वर्ग इसे धूमधाम से मनाते हैं; इसलिये इन्हें किसी धार्मिक प्रतीक से नहीं जोड़ा जाता है। सभी जगह अमृत महोत्सव की धूम दिखाई दे रही है। लेकिन इस बात पर विचार जरूर किया जायेगा कि कौन- कौन लोग कैसी और कितनी भागीदारी इस महोत्सव में निभा रहे हैं। यद्यपि कि, बहुत से लोगों की उत्सुकता यह जानने की है कि यह अमृत महोत्सव क्या है और इस बार आजादी का जश्न अमृत महोत्सव के तौर पर क्यों मनाया जा रहा है? ऐसे प्रश्न करने वालों से सतर्क रहने की भी योजना है; क्योंकि ऐसे प्रश्न देश हितैषी नहीं हैं।
(यथावत, नयी दिल्ली 01- 15 नवम्बर 2021 के अंक में प्रकाशित।)
डॉ कौस्तुभ नारायण मिश्र
