कांग्रेसी आईक्यू और संघी विद्याभारती

कांग्रेस के पर्यायवाची आर जी ने कहा है कि- \’आरएसएस अपने स्कूलों के जरिये देश में, पाकिस्तान के कट्टरपन्थी इस्लामवादी मदरसों की ही तरह अपने स्कूलों में एक खास तरह की दुनिया दिखाता है। कोई यह नहीं पूछता कि आरएसएस के विद्यालयों को पैसा कहाँ से मिलता है? यह भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर कब्जा है और इसे संघ के हाथों से वापस लेना ही होगा; इसमें मेहनत लगेगी और यह आसानी से नहीं होने वाला है।\’ कांग्रेस को यह नहीं मालूम कि सैकड़ों-हजारों स्कूल चलाने वाली संस्था विद्याभारती मिशनरीज की तरह लाभ कमाने वाली या मतान्तरण के लिये प्रलोभन देने वाली संस्था या स्कूल नहीं हैं; न तो यह आतंक फैलाने एवं बलपूर्वक मतान्तरण कराने वाली इस्लामवादी मदरसों की तरह संस्था है। इसलिये कांग्रेसी पर्यायवाची संज्ञावाचक को सवाल पूछने का कोई कारण नहीं है। दूसरा, यह स्कूल संघ नहीं, विद्याभारती के द्वारा चलाये जाते हैं और विद्याभारती, शिक्षा के क्षेत्र में देश एवं समाज हित में संघ की विचारधारा को स्वीकार करके कार्य करती है; जैसे राजनीतिक क्षेत्र में भाजपा, संघ की विचारधारा को स्वीकार कर स्वतन्त्र रूप से अपना कार्य करती है। जो कुछ भी आर जी को नजर आ रहा है, उसमें देश की दक्षिणपन्थी अर्थात सकारात्मक विचारधारा का दृष्टिकोण स्पष्ट है। उक्त टिप्पणी पर केन्द्रीय मन्त्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि – \’राहुल गाँधी को आरएसएस को समझने में बहुत समय लगेगा। आरएसएस देशभक्ति की दुनिया की सबसे बड़ी पाठशाला है; इसीलिये दुनिया में उसका आदर है और भारत में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। लोगों में सकारात्मक एवं निर्माणकारी परिवर्तन लाना और लोगों को देशभक्ति के लिये प्रेरित करना, संघ का मुख्य कार्य है।\’ पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तानी मदरसों में सिर्फ और सिर्फ नफरत फैलाने के लिये जिहादी पढ़ाई होती है, जिससे आतंकी पैदा होते हैं। आज की तिथि में पूरा पाकिस्तान आतंकी देश बन चुका है, इसको पूरा विश्व किसी न किसी रूप में स्वीकार कर रहा है। कांग्रेस को बताना चाहिये कि, आखिर देश में संघ से जुड़े स्कूलों पर आतंक के कब-कब आरोप लगे हैं? या फिर संघ की विचारधारा के साथ पढ़ने वाले छात्र कब आतंक में लिप्त पाये गये हैं? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका हाँ में जवाब कांग्रेस के पास क्या किसी के भी पास नहीं हो सकता। इसलिये यह जानना समझना जरूरी है कि आखिर राहुल अर्थात कांग्रेस ऐसे आरोप क्यों लगा रही है? राहुल के ऐसे आरोपों से आखिर किसे खुशी मिलती है? और इसका क्या परिणाम होगा? यह क्या केवल पप्पूगीरी का वयान है या किसी साजिश का हिस्सा? इस सवाल का उत्तर ढूंढना देशहित में बहुत जरूरी है।

पाकिस्तानी मदरसों से संघी विचारधारा को मानने वाले विद्या भारती के स्कूलों की तुलना करने वाले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के आरोप में कितनी सच्चाई है? वास्तविक प्रश्न यह नहीं है; मुख्य प्रश्न यह है कि कांग्रेस और उसके मालिकों को सत्य और तथ्य की कितनी जानकारी है? अथवा वे सत्य और तथ्य की कितनी जानकारी रखना और देश को कितना गुमराह करना चाहते हैं? पीएम, बीजेपी और संघ पर काँग्रेस और उसके आका लोग पहले भी हमलावर रहे हैं। लेकिन पहली बार उन्होंने संघ से जुड़े स्कूलों को निशाने पर लिया है, जिसके अन्तर्गत 20 हजार से अधिक स्कूल आते हैं और जहाँ लाखों छात्र पढ़ते हैं। राहुल गाँधी अर्थात काँग्रेस द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से वैचारिक रूप से जुड़े विद्या भारती के स्कूलों की तुलना पाकिस्तानी कट्टरपन्थी मदरसों से करना स्वाभाविक है; क्योंकि काँग्रेस और आर जी और उनका परिवार एक तरह से एक दूसरे या एक तीसरे के पर्याय हैं, उन्हें किसी न किसी रूप में सत्ता के लिये उनका अकारण विरोध करना ही है। इस आलोक में भाजपा और काँग्रेस की आपसी राजनीतिक लड़ाई तो स्वाभाविक है; लेकिन इस वयान ने सत्य और तथ्य से परे काँग्रेस की वैचारिक, व्यावहारिक एवं राष्ट्रीय राजनीति की कलई खोल दिया है। इस वयान ने काँग्रेस की न सिर्फ अराष्ट्रवादी और अराष्ट्रीय मानसिकता को उजागर किया है; बल्कि राजनीतिक और सत्ता के आकर्षण में गिरावट के निम्नतम स्तर को भी प्रकट किया है। यह बात देश की अधिकांश और दुनिया की लगभग आधी से अधिक आबादी जानती है कि सितम्बर 1925 में 36 वर्ष के एक नवजवान ने नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को स्थापित करने की घोषणा किया और उसका क्रियान्वयन ऐसा किया कि संघ आज के अपने वर्तमान उज्जवल एवं यशस्वी रूप में देश और दुनिया के सामने खड़ा है। उस नवजवान को लोग डॉक्टरजी के नाम से पुकारते हैं, साथ ही संघ के स्वयंसेवक तथा कार्यकर्ता उन्हें पूज्य आद्यसरसंघचालक कहते थे और कहते हैं। उनका नाम केशव बलिराम हेडगेवार था। संघ ने 95 वर्ष की यात्रा पूरा किया है और उसकी जो विचारधारा है, आज उसी विचारधारा की पार्टी भाजपा की केन्द्र में और अन्य अनेक राज्यों में सरकार या सत्ता है। लेकिन सवाल है कि इस विचारधारा से जुड़े स्कूलों की तुलना पाकिस्तान के चरमपन्थी मदरसों से करना उचित है? पाँच राज्यों में चुनाव होने हैं और चुनाव से पहले अपने वोटबैंक को मजबूत करने की कोशिश राजनीतिक दल करते है; लेकिन क्या देश और भारतीय समाज की कीमत पर यह कार्य करना चाहिये? दूसरा, क्या वास्तव में इस वयान से कांग्रेस को सत्ता की राजनीति में लाभ मिलेगा? यदि लाभ मिलेगा तो क्या ऐसे लाभ के लिये देश विरोधी कार्य एवं वयान देना चाहिये?

संघ की स्थापना के एक वर्ष बाद इसका नामकरण 1926 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रूप में हुआ। साढ़े नौ दशकों की लम्बी यात्रा में संघ के स्वयंसेवक अर्थात संघ की विचारधारा को मानने वाले लोग तथा अन्य विद्या भारती जैसे संगठन राष्ट्रसेवा, समर्पण और संस्कारों पर जोर देते रहे हैं। उनके लिये व्यक्ति से महत्वपूर्ण संगठन और दल से बड़ा देश रहा है। संघ व्यक्ति निर्माण की पाठशाला है। पहली बार सत्ता के मद से अप्रभावी रहते हुये कांग्रेस या उसके आका ने संघ से जुड़े स्कूलों को निशाने पर लिया है। इसीलिये यह जानना और अनजाने एवं नासमझ लोगों द्वारा संघ को जानना समझना आज बड़ी बात बन गयी है? आज देश के लिये सच जानना एवं उस सच को जन-जन तक प्रचारित करना और भी जरूरी है कि आरएसएस के स्कूलों में होता क्या है? संघ की विचारधारा को मानने वाली संस्था विद्याभारती की देश में स्कूलों की एक बड़ी लम्बी श्रृंखला है। पहले सरस्वती शिशु मन्दिर की स्थापना 1952 में गोरखपुर में हुई। तब से अब तक 68-69 वर्षों में इन स्कूलों में लाखों छात्र-छात्राओं ने पढ़ाई किया है; लेकिन उन पर कभी कट्टरपन्थी या चरमपन्थी होने के आरोप नहीं लगे। जबकि पाकिस्तानी मदरसों की शिक्षा प्रणाली आज भी पूरी दुनिया के लिये चिन्ता का विषय है। विद्याभारती के सिद्धान्त एवं व्यावहार के अनुसार उनका मकसद ऐसा राष्ट्रीय शिक्षा तन्त्र तैयार करना है, जिससे युवा पुरुषों और महिलाओं की ऐसी पीढ़ी बन सके, जो भारतीयता के प्रति समर्पित हो और देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो। शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से विकसित हो तथा जीवन की चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो। उनके अन्दर लौकिक, आध्यात्मिक, अलौकिक तीनों प्रकार की चेतना का संचार हो। केवल स्कूली शिक्षा को ही लेकर विद्याभारती का लक्ष्य स्पष्ट नहीं है; बल्कि सम्पूर्ण शिक्षा व्यवस्था एवं पद्धति को लेकर स्पष्ट तथा पारदर्शी है।

पाकिस्तानी मदरसों में आतंक का पाठ पढ़ाया जाता है। यह बात दुनिया के सामने पहली बार 2001 के हमले के बाद आयी। अब तक अनेक शोध एवं खोजी संस्थान यह दावा कर चुके हैं कि अलकायदा, हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे प्रायोजित तरीके से भारत में सक्रिय आतंकी संगठनों का पाकिस्तानी मदरसों से गहरा जुड़ाव है। पाकिस्तानी सरकारें ऐसे मदरसों को सहयोग करती आयी हैं; जिसका तुष्टिकरण के कारण देश में सत्तासीन सरकारें और उनके राजनीतिक संगठनों ने अब तक इसका संज्ञान नहीं लिया है। ऐसे में संघ से जुड़े स्कूलों और पाकिस्तानी मदरसों में अन्तर समझना मुश्किल नहीं है; लेकिन कांग्रेस की सोच और उसकी बुद्धिलब्धि अर्थात आईक्यू को समझना बहुत मुश्किल है। वह भी तब, जब पाँच ऐसे राज्यों में चुनाव हो रहे हों, जहाँ कांग्रेस के सामने भाजपा बड़ी चुनौती हो तथा कांग्रेस एवं उसके रहनुमा परिवार के सामने जीवन-मरण का प्रश्न हो। यह जीवन- मरण का प्रश्न उनके लिये इसलिये भी अतिशय विकट हो गया है कि, ये पाँचों वैसे राज्य हैं, जहाँ अब अन्तिम रूप से सिद्ध होना है कि संघ की विचारधारा इस देश में पूर्णतः फलीभूत होने जा रही है या गैरसंघी अर्थात अभारतीय विचारधारा की कुछ साँसे अभी भी देश में शेष हैं। एक और जरूरी सवाल है कि आखिर आर जी को उनकी पार्टी के लोग ही गम्भीरता से क्यों नहीं लेते? फिर भी वे पार्टी के रहनुमा कैसे बने हुये हैं? मतलब अब भी वही परिवार कांग्रेस का सब कुछ है। वे लगभग दो दशक से सक्रिय राजनीति में हैं तथा 2004 से अनवरत सांसद हैं। इतने लम्बे राजनीतिक जीवन के बाद भी लोग या तो उन्हें कांग्रेस के शहजादे और पप्पू के रूप में जानते हैं या अदूरदर्शी एवं अज्ञानी बचकानी हरकत करने वाले राजनेता के रूप में। फिर भी उनको संघ की प्रेरणा से चलने वाले स्कूलों में क्या पढ़ाया जाता है! इस पर कोई बयान देने से पहले उन्हें संघ व विद्याभारती विद्यालयों को निकट से अवश्य देखना समझना और जानना चाहिये। उनको नहीं मालूम कि विद्या भारती के विद्यालयों में अब तक लगभग एक लाख मुस्लिम व ईसाई छात्र शिक्षा ले चुके हैं और वर्तमान समय में भी हजारों लोग शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विद्या भारती की एलुमनाई एसोसिएशन की सदस्य संख्या दुनिया में किसी भी शिक्षण संस्थान या शिक्षा संस्थान के समूह से बहुत अधिक है। पूरे देश के विभिन्न बोर्ड्स के परीक्षा परिणामों में विद्या भारती द्वारा संचालित विद्यालयों के बच्चों का लगातार अर्थात प्रत्येक शैक्षणिक सत्र में महत्वपूर्ण स्थान रहता है। इसलिये आर जी के उक्त वयान की जितनी भी गहराई में आप जायेंगे, यही पायेंगे कि उनका आरोप झूठा है और उसका उद्देश्य देश की जनता को सत्ता के लिये गुमराह करना है। उक्त वयान या तो देश विरोधी साजिश है या बचकानी मानसिकता का घोषणा-पत्र; जो केवल आर जी परिवार ही नहीं, समूचे कांग्रेस के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

(मार्च 2021 के अंक में विद्या भारती की पत्रिका \’सृष्टि सम्वाद भारती\’ में प्रकाशित।)

डॉ कौस्तुभ नारायण मिश्र